बजट सत्र के दोनों सदनों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, विभाजन के बाद बने माहौल में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था- ‘पाकिस्तान के हिंदू और सिख, जो वहां नहीं रहना चाहते, वे भारत आ सकते हैं. उन्हें सामान्य जीवन मुहैया कराना भारत सरकार का कर्तव्य है. मुझे प्रसन्नता है कि संसद के दोनों सदनों द्वारा नागरिकता संशोधन कानून बनाकर बापू की इच्छा को सम्मान दिया गया. इसके बाद उन्होंने धारा 370 का जिक्र करते हुए कहा कि हमारी सरकार ने इसे हटकार कश्मीर को समान मौका दिया है.
अर्थव्यवस्था के बिगड़ते हालात के बीच शुरु होने वाले संसद के बजट सत्र वैसे तो राष्ट्रपति ने भारतीय अर्थव्यवस्था की बड़ी और लम्बी तस्वीर लोगों के सामने पेश की. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है. इसके लिए सभी स्टेकहोल्डर्स से बातचीत करके अर्थव्यवस्था में हर स्तर पर काम किया जा रहा है. दुनियाभर से आने वाली चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था की नींव मजबूत है. हमारा विदेशी मुद्रा भंडार 450 बिलियन डॉलर से भी ऊपर के ऐतिहासिक स्तर पर है. राष्ट्रपति ने कहा, “Minimum Government, Maximum Governance” के मूल सिद्धांत पर चलते हुए सरकार द्वारा अनेक Reform किए गए हैं.
पिछले कुछ वर्षों में मोदी सरकार रोजगार के मोर्चे पर लगातार विपक्ष के निशाने पर रही है. सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी पिछले एक साल में इकोनॉमी का सबसे चर्चित मसला रहा है. देश की जीडीपी ग्रोथ की रफ्तार काफी घट गई है और आधा दर्जन से ज्यादा देसी-विदेशी एजेंसियों ने यह अनुमान जारी किया है कि मौजूदा वित्त वर्ष 2019-20 में जीडीपी ग्रोथ रेट 5 फीसदी के आसपास ही रहेगा. बात सिर्फ इस आंकड़े की नहीं है, इकोनॉमिक सर्वे से यह पता चलेगा कि क्या भारतीय अर्थव्यवस्था अब सुस्ती से बाहर आएगी? क्या अर्थव्यवस्था में सुधार के कोई संकेत दिख रहे हैं? कब तक भारत फिर से तेज रफ्तार को हासिल कर पाएगा ?
पिछले कुछ वर्षों में मोदी सरकार रोजगार के मोर्चे पर लगातार विपक्ष के निशाने पर रही है. जीडीपी में गिरावट का असर नौकरियों पर भी पड़ा है और पीएफ या अन्य आंकड़े जारी कर सरकार यह बताने की कोशिश करती रही है कि लोगों को रोजगार मिल रहा है. लेकिन वास्तव में रोजगार की क्या स्थिति रही है. आगे इसमें सुधार किस तरह से होगा, इसकी तस्वीर इकोनॉमिक सर्वे से मिलेगी. लेकिन राष्ट्रपति के बिगड़ती अर्थव्यवस्था पर मौन रवैया से लोग सवाल कर रहे हैं.