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गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत का विवादित बयान, हिंदू समाज है एक नंबर का पाखंडी

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विशाल मिस्त्री राजपिपला: गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने नर्मदा जिले के नांदोद तालुका के पोइचा गांव में नीलकंठधाम-स्वामीनारायण मंदिर परिसर में हिंदू समाज के बारे में एक विवादित बयान दिया कि हिंदू समाज पाखंडी नंबर 1 है. यह विवादास्पद बयान संगोष्ठी कार्यक्रम “प्राकृतिक कृषि…प्रकृति के प्रति समर्पण” में दिया गया था. जिसका आयोजन पोइचा गांव में किया गया. उनके इस बयान के बाद हिंदू समाज में काफी आक्रोश फैल गया है. सांसद मनसुखभाई वसावा, जिला पंचायत अध्यक्ष पर्युषाबेन वसावा, जिला कलेक्टर श्वेता तेवतिया, जिला विकास अधिकारी अंकित पन्नू, पूर्व मंत्री मोतीसिंह वसावा इस कार्यक्रम में मौजूद थे.

गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने नांदोद तालुका के पोइचा गांव में नीलकंठधाम-स्वामीनारायण मंदिर परिसर में अपने व्याख्यान में कहा कि लोग मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्च में जाते हैं ताकि हम पूजा करें जिससे भगवान प्रसन्न होंगे. लेकिन अगर आप जैविक खेती शुरू करते हैं तो भगवान अपने आप खुश हो जाएंगे. रासायनिक खेती का मतलब है जानवरों को मारना, जबकि प्राकृतिक खेती जानवरों को जीवन देती है. आदमी गाय माँ की पूजा करता है, उसके सिर पर तिलक लगाता है, लेकिन गाय माँ दूध देना बंद कर देती है, तो उसे घर से निकाल देता है. जो लोग दूध नहीं पीते या गाय माता को नहीं पालते वे भी स्वार्थ के लिए गाय माता की महिमा कहते हैं. इसलिए मैं कहता हूं कि मनुष्य इस दुनिया में अनगिनत जानवरों में सबसे बड़ा पाखंडी, ढोंगी, नकली और दिखावा करने वाला है, हिंदू समाज पाखंडी नंबर 1 है.

राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने आगे कहा कि प्राकृतिक खेती अभियान पिछले तीन वर्षों से तेज गति से आगे बढ़ रहा है, कोरोना काल को छोड़कर गुजरात में यह मिशन पहले ही दुगनी गति से शुरू हो चुका है, राज्य सरकार द्वारा इस पहल को प्रोत्साहित किया जा रहा है. नर्मदा जिले के लगभग 11 हजार किसान प्राकृतिक खेती का मार्गदर्शन लेकर लगभग 3371 एकड़ भूमि में प्राकृतिक खेती कर रहे हैं. देश के किसान आत्मनिर्भर होंगे तो देश आत्मनिर्भर बनेगा. किसान और कृषि को आत्मनिर्भर बनाने का एक मात्र रास्ता प्राकृतिक कृषि है.

गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने समारोह को संबोधित करते हुए आगे कहा कि भविष्य में गुजरात प्राकृतिक कृषि के क्षेत्र में पूरे देश का नेतृत्व करेगा. जंगल में पेड़ों और पौधों को कोई रासायनिक उर्वरक या कीटनाशक नहीं दिया जाता है. बावजूद इसके वह स्वाभाविक रूप से बढ़ता और विकसित होता है. इसी प्रकार खेत में प्राकृतिक रूप से खेती की जाती है गाय के एक ग्राम गोबर में लगभग 300 करोड़ सूक्ष्म जीव होते हैं. गोमूत्र खनिजों का भंडार है. देसी गाय का गोबर गोमूत्र, गोबर, गुड़, पानी और मिट्टी के मिश्रण से बने एक जीवित चूल और ठोस चूल संवर्धन के रूप में कार्य करता है.

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