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ग्लोबल फूड सिक्योरिटी कॉल टू एक्शन सम्मेलन में बोले केंद्रीय मंत्री- हमारी नीति नेबरहुड फर्स्ट

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केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने कल न्यूयार्क में ‘वैश्विक खाद्य सुरक्षा-काल टू एक्शन’ पर उच्च स्तरीय मंत्रिस्तरीय बैठक को संबोधित किया. इस मौके पर उन्होंने कहा कि यूक्रेन संघर्ष से उत्पन्न होने वाली खाद्य सुरक्षा चुनौतियों के लिए हमें रचनात्मक रूप से प्रतिक्रिया देने की आवश्यकता है. यह स्पष्ट है कि संघर्ष का एक प्रारंभिक राजनयिक समाधान सर्वोपरि है.

केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री वी.मुरलीधरन ने आगे कहा कि ये उपाय उन देशों को अनुमोदन के आधार पर निर्यात की अनुमति देते हैं जिन्हें अपनी खाद्य सुरक्षा मांगों को पूरा करने की आवश्यकता है. यह संबंधित सरकारों के अनुरोध पर किया जाएगा. अपनी समग्र खाद्य सुरक्षा और सहायता, पड़ोसी और अन्य कमज़ोर विकासशील देशों की जरूरतों के प्रबंधन करने के लिए, हमने 13 मई 2022 को गेहूं निर्यात के संबंध में कुछ उपायों की घोषणा की है.

‘ग्लोबल फूड सिक्योरिटी कॉल टू एक्शन’ मंत्रिस्तरीय बैठक में अपनी बात रखते हुए केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन ने आगे कहा कि कई छोटे देशों को आज बढ़ती लागत और खाद्यान्न की कठिनाई की दोहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. यहां तक कि भारत जैसे देशों के पास भी, जिनके पास पर्याप्त स्टॉक है, खाद्य कीमतों में अनुचित वृद्धि देखनी पड़ रही है. इससे स्पष्ट है कि जमाखोरी की समस्या है.

उन्होंने आगे कहा कि हम इस कठिन समय में श्रीलंका को भी खाद्य सहायता उपलब्ध करा रहे हैं.’वसुधैव कुटुम्बकम’, जिसका अर्थ दुनिया एक परिवार है, की हमारी लोकनीति को ध्यान में रखते हुए और हमारी नेबरहुड फर्स्ट नीति के तहत हम अपने पड़ोसियों की जरूरत के समय में उनकी सहायता करना जारी रखेंगे. अफ़गानिस्तान में बिगड़ती मानवीय स्थिति को देखते हुए भारत ने अफ़गानिस्तान के लोगों को 50,000 मीट्रिक टन गेहूं दिया है. भारत ने म्यांमार के लिए भी अपना मानवीय समर्थन जारी रखा, जिसमें 10,000 टन चावल और गेहूं का अनुदान शामिल है.

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