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सावरकर के खिलाफ बोले मैग्सेसे पुरस्कार विजेता, संदीप पांडे के खिलाफ दर्ज हुई FIR

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मैग्सेसे पुरस्कार विजेता मानव अधिकार कार्यकर्ता संदीप पांडेय के खिलाफ कथित तौर पर हिंदुत्व विचारक सावरकर के खिलाफ अनुचित टिप्पणी को लेकर मामला दर्ज किया गया है. हिंदू महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने शिकायत दर्ज कराई है. उन्होंने दावा किया है कि संदीप पांडे ने रविवार को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में नागरिकता संशोधन कानून विरोधी प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए टिप्पणी की थी. संदीप पांडेय ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा था कि “देश की गंगा-जमुनी संस्कृति के विपरीत समाज को हिंदू और मुसलमानों में बांटने वाले लोग वही हैं, जिन्होंने ब्रिटिश राज के दौरान भी यही काम किया था और इसके बदले ब्रिटिश हुकूमत से वजीफा पाते थे. ये ‘फूट डालो और राज करो’ की अंग्रेजों की नीति पर चलने वाले लोग हैं”

मैग्सेसे पुरस्कार विजेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता संदीप पांडे के खिलाफ हिंदू महासभा की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है सिविल लाइंस पुलिस थाने में दर्ज भारतीय दंड संहिता की धारा 153 ए (दंगों के इरादे से उकसावे) और 505 (1) बी (जनता या समुदाय को अपराध करने के लिए उकसाना) के तहत मामला दर्ज किया गया है.

पांडे ने द इंडियन एक्सप्रेस को बुधवार (22 जनवरी) को बताया कि, “मैंने अपने भाषण के दौरान कहा कि सावरकर ने ब्रिटिश सरकार से पेंशन ली और दया याचिका लिखी, इसलिए हम उन्हें स्वतंत्रता सेनानी कैसे कह सकते हैं। यह सरकार किस तरह का उत्पीड़न कर रही है।” यह उत्पीड़न वैसा ही है जैसा अंग्रेज करते थे। सरकार अंग्रेजों के तरीकों का उपयोग कर रही है क्योंकि इस सरकार के लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम में कभी भाग नहीं लिया। सावरकर को छोड़कर उनमें से कोई भी जेल नहीं गया और यहां तक ​​कि सावरकर भीख मांग कर बाहर आए और अंग्रेजों से पेंशन लेते रहे। ” साथ ही पांडे ने कहा कि वह छात्र समन्वय समिति द्वारा आयोजित एएमयू में एक छात्र विरोध और कैंडल मार्च को संबोधित कर रहे थे।

एफआईआर होने के बाद पांडे ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार ने राज्य में सभी गलत कार्यो के लिए उन्हें निशाना बनाने की आदत बना ली है. इसीलिए ‘मुझे अब अक्सर निशाना बनाया जाता है, सरकार ने अनुच्छेद 370 को रद्द करने के बाद मुझे कश्मीरी लोगों के लिए कैंडल मार्च निकालने की अनुमति तक नहीं दी. मुझे नजरबंद रखा गया था. इस माह की शुरुआत में मुझे अयोध्या जाने से रोका गया. यह लोकतांत्रिक ढंग से, शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन पर भी दबाव बनाने की रणनीति है.