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केरल हाईकोर्ट का काउंसिल से सवाल, पेट्रोल-डीजल GST के दायरे में क्यों नहीं आ सकता?

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कोच्चि: पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में क्यों नहीं लाया जा सकता, इस पर केरल हाईकोर्ट ने जीएसटी काउंसिल से जवाब तलब किया है. केरल उच्च न्यायालय की एक पीठ ने केंद्र सरकार और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद को पेट्रोल और डीजल को जीएसटी में शामिल न करने के कारणों को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है.

कोर्ट ने पूछा कि पेट्रोलियम उत्पाद जीएसटी के दायरे में क्यों नहीं आ सकते. मुख्य न्यायाधीश एस मणिकुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने केरल प्रदेश गांधी दर्शनवाड़ी नामक एक संगठन द्वारा दायर एक रिट याचिका पर यह आदेश जारी किया है. याचिका में पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में शामिल नहीं करने के जीएसटी परिषद के फैसले को चुनौती दी है.

याचिकाकर्ता ने कहा कि जीएसटी परिषद की बैठक में हाल ही में निर्णय लिया गया था कि पेट्रोल और डीजल को इस स्तर पर जीएसटी के तहत शामिल करना उचित नहीं है. महत्वपूर्ण है कि परिषद की बैठक पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के तहत लाने की मांग पर विचार करने के लिए हुई थी. परिषद ने इस बैठक में पेट्रोल और डीजल को जीएसटी में शामिल करने से इनकार कर दिया था.

मामले की सुनवाई के दौरान संगठन का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील अरुण बी वर्गीज मौजूद रहे. वर्गीज ने कोर्ट में तर्क दिया कि जीएसटी परिषद ने याचिकाकर्ता के अनुरोध को खारिज करने का कोई वैध कारण नहीं बताया. इतना ही नहीं परिषद ने इस पर चर्चा तक नहीं की. मौजूदा स्थिति इस मामले को तय करने के लिए काफी परिपक्व थी क्योंकि पेट्रोल और डीजल की कीमत दिन-ब-दिन बढ़ रही थी और अर्थव्यवस्था पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ा था. वास्तव में जो लोग पेट्रोल और डीजल का उपयोग नहीं करते हैं वह भी तेल की कीमतों में वृद्धि से समान रूप से प्रभावित होते हैं.

गौरतलब है कि बीते दिनों उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में GST काउंसिल की 45वीं बैठक हुई थी. इस बैठक में आम आदमियों को बड़ा झटका दिया था. पेट्रोल-डीजल को जीएसटी दायरे में शामिल करने से काउंसिल ने इनकार कर दिया गया. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लखनऊ में जीएसटी परिषद की 45वीं बैठक के बाद कहा कि क्या पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाया जाए, इस मुद्दे पर कोर्ट के निर्देश के चलते चर्चा हुई. कई सदस्यों ने साफ तौर पर कहा कि वे नहीं चाहेंगे कि इसे जीएसटी के दायरे में लाया जाए.

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