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मंदिर समाज जीवन का श्रद्धा केंद्र था, विदेशियों ने हमारी इस शक्ति को खत्म किया: संघ प्रमुख

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उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के खतौली में कृष्ण मंदिर के 65वें स्थापना दिवस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने पूजा अर्चना के बाद संत सम्मेलन को संबोधित करते हुए लोगों को राष्ट्र को उन्नति की ओर ले जाने का संकल्प दिलाया. इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि देश को विश्व गुरु बनाने के लिए सबको सहयोग करना होगा.

कृष्ण मंदिर के 65वें स्थापना दिवस के मौके पर संत सम्मेलन को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि एक वक्त में मंदिरों में तरह-तरह का रोज़गार भी मिलता था. मंदिरों में स्कूल चलते थे, मंदिर सारे समाज जीवन का श्रद्धा का केंद्र थे. इसलिए तो विदेशी आक्रमक हो गए केवल लूट-खसोट को छोड़कर… जब हमको गुलाम करना चाहा तो मंदिरों का विध्वंस किया. केवल संपत्ति के लिए ही नहीं बल्कि मनोबल तोड़ने के लिए भी.

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आगे कहा कि मंदिर में क्या नहीं होता था उस समय, अध्यात्म तो होता ही था, उपासना भी होती थी. जिससे लोगों का जीवन सुचिता में बने और धीरे-धीरे वो सत्य की ओर बढ़े. वो सब मंदिरों में होता ही था.

उत्तर प्रदेश के खतौली में मंदिर स्थापना दिवस कार्यक्रम में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने आगे कहा कि पहले मंदिर में तरह-तरह के रोजगारों को आश्रय मिलता था, रोजगार मंदिर के भरोसे चलते थे. मंदिरों की जमीनों पर तरह-तरह के खुशी के प्रेरक होते थे. हमारे श्रद्धा के केंद्र रोज के जीवन के व्यवहार के केंद्र ये मंदिर थे.

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