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CAA पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, केन्द्र 4 हफ्ते में दे जवाब, CJI बोले- एकतरफा रोक नहीं लगा सकते

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सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता संशोधन कानून की संवैधानिक वैधता परखने की मांग करने वाली याचिकाओं को संविधान पीठ के पास भेजने का फैसला किया है. साथ ही कानून पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने फैसला लिया कि कानून पर फिलहाल रोक नहीं लगाई जाएगी और सभी याचिकाएं संविधान पीठ में भेजी जाएगी. सीजेआई ने कहा कि इस कानून पर हम एकपक्षीय रोक नहीं लगा रहे. सभी याचिकाओं को देख कर फैसला किया है कि कानून पर फिलहाल रोक नहीं लगाई जाए.

सुनवाई शुरू होते ही नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ दलीलें पेश करते हुए कपिल सिब्‍बल ने कोर्ट से गुजारिश की कि जब तक नागरिकता कानून पर कोर्ट कोई अंतिम निर्णय निर्देश नहीं देता, NPR प्रकिया को तीन महीने के लिए टाल दिया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरन कहा कि याचिकाओं की कॉपी केंद्र को सौंपी जांए और उन्हें जवाब देने दें. अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल ने कहा, ‘हमें सिर्फ 60 याचिकाओं की कॉपी मिली है। केंद्र सरकार को याचिकाओं की कॉपी दी जाए. इतना ही नहीं उन्होंने सीजेआई की कोर्ट में लोगों की भीड़ पर भी शिकायत की और विदेशी कोर्ट में जारी होने वाले निर्देश का हवाला दिया.

इस कानून को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं में मुस्‍लिम लीग कांग्रेस नेता जयराम रमेश, राजद नेता मनोज झा, तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा, AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी, जमीयत उलेमा-ए-हिंद, ऑल असम स्‍टूडेंट्स यूनियन, पीस पार्टी जैसी कई संस्था और पार्टियां शामिल हैं.

मुस्लिम लीग की याचिका में कहा गया है कि CAA समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है. इस कानून से अवैध प्रवासियों के एक वर्ग को नागरिकता उपलब्‍ध कराई जाती है, वहीं धर्म के नाम पर कुछ को नागरिकता से वंचित किया गया है. याचिका में कानून पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई है. याचिका में कहा गया है कि यह कानून भारतीय संविधान के खिलाफ है. इस कानून को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की ओर से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन गया.

गौरतलब हो कि इससे पहले 9 जनवरी को सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने इस कानून को लेकर देशभर में हो रहे हिंसक प्रदर्शन पर चिंता जताई थी और कहा था कि हिंसा रुकने पर ही वे सुनवाई करेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने 18 दिसंबर को नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर परीक्षण करने का निर्णय लेते हुए सरकार को नोटिस जारी किया था.