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सूरत: हिंदी दिवस पर बोले अमित शाह, महात्मा गांधी ने कहा था राजभाषा हिंदी के बिना ये राष्ट्र गूंगा है

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सूरत: हिंदी को 14 सितंबर 1949 को राजभाषा का दर्जा दिया गया था. इसीलिए इस दिन को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है. हिंदी उन भाषाओं में शुमार है जो दुनिया में सबसे ज्यादा बोली और समझी जाती है. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने हिंदी को जनमानस की भाषा भी कहा था. हिंदी दिवस के मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सूरत में दूसरे अखिल भारतीय आधिकारिक भाषा सम्मेलन में भाग लिया. इस दौरान उनके साथ गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी मौजूद रहे.

गुजरात के सूरत में हिंदी दिवस समारोह के द्वितीय अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को संबोधित करते केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश और दुनिया के सभी हिंदी प्रेमियों को हिंदी दिवस की बहुत बहुत शुभकामनाएं. हम सबके लिए संविधान सभा के निर्णय को सिर्फ याद करने का दिन नहीं है. 75 साल से 100 साल ये जो अमृत काल है, ये संकल्प लेने का और संकल्प सिद्धि करने का समय है.

गुजरात में हिंदी दिवस समारोह को संबोधित करते हुए आमित शाह ने आगे कहा कि हम सभी देशवासियों को संकल्प लेने की जरूरत है कि 25 साल के अंदर हमारा देश भाषा की लघुता ग्रंथी से मुक्त होकर हमारी स्वभाषाओं में देश का विकास करेगा और देश को दुनिया के सर्वोच्च स्थान पहुंचाएगा है.

इतना ही नहीं उन्होंने समारोह को संबोधित करते हुए आगे कहा कि हमारी राजभाषा और हमारी स्थानीय भाषाएं विश्व की सबसे समृद्ध भाषाओं में से एक है. जब तक हम इस बात का संकल्प नहीं करते कि इस देश का शासन, प्रशासन, इस देश का ज्ञान और अनुसंधान हमारी भाषाओं में होगा, राजभाषाओं में होगा. तब तक हम इस देश की क्षमताओं का उपयोग नहीं कर सकतें. महात्मा गांधी ने कहा था कि राजभाषा हिंदी के बिना ये राष्ट्र गूंगा है हिंदी ही इस राष्ट्र को बोलता कर सकती है.

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